शिव पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया

 शिव पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया
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Noida news : सेक्टर-82 स्थित प्राचीन तपोभूमि ब्रम्हचारी कुटी में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा में चौथे दिन कथा में व्यास महेश पाठक शास्त्री जी ने शिव पार्वती विवाह का रोचक वर्णन किया। हिमालय राज की कन्या पार्वती बड़ी होने लगती हैं। पार्वती ने मन में प्रण लिया की वह शिव को पति के रूप में प्राप्त करेंगी। देवता भी शिव जी को मनाते हैं कि वह पार्वती से विवाह कर लें लेकिन शिव जी इसके लिए तैयार नहीं हुए। माता पार्वती शिव जी को प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या करती हैं। भगवान शिव प्रसन्न हो विवाह के लिए तैयार हो जाते हैं। देवताओं , भूत ,पिशाचों को लेकर तन में भस्म लगाए शिव बारात लेकर हिमालयराज के यहां पहुंचते हैं। माता मैना दूल्हे का भेष देखकर डर जाती हैं और पार्वती का विवाह करने से मना कर देती हैं ।सभी ने समझाया कि शिव जी कोई साधरण नहीं हैं वह तो देवों के देव हैं। मां पार्वती और भगवान शिव का विवाह होता है और देवता पुष्पों की वर्षा करते हैं । उन्होंने बताया कि शिव जी पर विल्वपत्र अर्पित करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। प्रातः रुद्र यज्ञ में यज्ञाचार्य मनोहर शास्त्री एवं उप यज्ञाचार्य सुमित तिवारी ने विद्वान ब्राह्मणों के साथ सभी आवाहित देवताओं का पूजन कराया। रुद्राभिषेक के बाद मंत्रोच्चार के बीच सभी देवताओं को आहुतियां प्रदान की गईं।
आयोजन समिति के सदस्य राघवेंद्र दुबे ने बताया कि श्रीशिव महापुराण की कथा में 26 अप्रैल को कार्तिकेय एवं गणेश चरित्र का वर्णन किया जाएगा। सभी शिव भक्त कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करें।
इस अवसर पर कुटी व्यवस्थापक विकास भारती, फलाहारी महाराज, देवेंद्र गुप्ता, एन के सोलंकी, पंडित अखिल पांडेय, रवि राघव, अजय श्रीवास्तव,अशोक कुमार, अमितेश सिंह, बृज किशोर, संतोष तिवारी, राजवीर सिंह, गुरुमेल सिंह, परदेशी, बाबा हलवाई , मंगू त्यागी, राज कुमार त्यागी, आदेश त्यागी , पंडित सागर द्विवेदी, सुभाष शर्मा, पंडित विनोद शास्त्री, पंडित गोविंद शास्त्री सहित तमाम भक्तजन मौजूद रहे।

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