यातायात सुधारने को एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने डीसीपी को दिए सुझाव

 यातायात सुधारने को एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने डीसीपी को दिए सुझाव
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Noida News : एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नाहटा ने डीसीपी ट्रैफिक अनिल कुमार यादव को पत्र देकर गौतमबुद्ध नगर के यातायात में सुधार के लिए सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि गौतमबुद्ध नगर के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र की पहचान औद्योगिक नगरी के तौर पर है। यहां 25 हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग स्थापित हैं। उनमें लगभग 15 लाख कर्मचारी एवं श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में जनपद की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ यातायात अपराधों पर भी प्रभावी अंकुश लगाने में कारगर हो सकते हैं।

सुरेंद्र नाहटा ने कहा कि प्रदेश के इस शोविंडों में जाम, अवैध पार्किंग और अतिक्रमण शहर की सड़कों के साथ ही यातायात व्यवस्था को बदहाल करने के लिए जिम्मेदार हैं। एक अनुमान के अनुसार हर साल शहर की सड़कों पर 50 हजार वाहन बढ़ रहे हैं। इसके मुकाबले इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। इसका खामियाजा घंटों जाम में फंसकर आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि यहां उद्योगों से अधिक वाहनों से प्रदूषण होता है। इसे रोकने के लिए दिल्ली की तर्ज पर सम-विषम (आड ईवन) सिस्टम लागू किया जाना चाहिए। रजनीगंधा अंडरपास से सेक्टर-12/22/56 तिराहे को जोड़ने वाले मास्टर प्लान-1 मार्ग को सिग्नल फ्री करने की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है। इस मार्ग पर अतिक्रमण को हटाया जाए और सड़क पर खड़े वाहनों को क्रेन से उठाने का अभियान लगातार जारी रखा जाए। शहर में ऑटो और ई-रिक्शा को व्यवस्थित करने के लिए कोड नंबर प्रणाली को सख्ती के साथ लागू किया जाना चाहिए। औद्योगिक सेक्टरों में आंतरिक सड़कों पर पार्किंग की व्यवस्था दुरुस्त बनाई जाए। नो पार्किंग जोन निर्धारित किए जाएं। औद्योगिक सेक्टर 1, 3 व 5 में प्राधिकरण द्वारा बनाई गई भूमिगत पार्किंग के आसपास सड़कों पर वाहन खड़ा करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। उद्योग मार्ग पर यातायात व्यवस्था सुगम बनाने के लिए नो पार्किंग जोन का नियम सख्ती से लागू कराया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शहर में जगह-जगह चौराहों-तिराहों को बंद किया गया है। इसकी वजह से लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। डायवर्जन व्यवस्था लागू होने पर ट्रैफिक सिग्नलों की संख्या कम होनी चाहिए, लेकिन इसके उलट सिग्नल बढ़ गए हैं। इससे ईंधन के साथ पैसों की बर्बादी हो रही है। अकसर तकनीकी खराबी के कारण ट्रैफिक सिग्नल ठप रहते हैं, जबकि इनके अनुरक्षण पर हर साल एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होता है। उन्होंने सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने का भी सुझाव दिया है। महामाया फ्लाईओवर, दलित प्रेरणा स्थल, डीएनडी फ्लाईवे, कालिंदी कुंज पर जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की जरूरत है। श्री नाहटा ने शहर में 40 से अधिक स्थानों पर ‘ऑपरेशन क्लीन’ चलाने का सुझाव दिया है।

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