Infertility : निसंतानता (इनफर्टिलिटी) के कारण वा उपचार

 Infertility : निसंतानता (इनफर्टिलिटी) के कारण वा उपचार

निसंतानता (इनफर्टिलिटी) के कारण व उपचार

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Noida news
डॉ. संगीता शर्मा स्त्री रोग विशेषज्ञ और लेप्रोस्कोपिक सर्जन

Noida Desk : आज के शादीशुदा युवा जोड़ों की मुख्य समस्या जो सामने आती है वह है निसंतानता (इनफर्टिलिटी) . इसी विषय में हमने शहर की नामी डॉक्टर व वरिष्ठ सलाहकार डॉ. संगीता शर्मा जो की स्त्री रोग विशेषज्ञ और लेप्रोस्कोपिक सर्जन से उन्होंने इसे एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि बांझपन, जिसे मेडिकल भाषा में ‘इनफर्टिलिटी’ भी कहा जाता है बांझपन पुरुष या महिला प्रजनन प्रणाली की एक बीमारी है जो 12 महीने या उससे अधिक नियमित असुरक्षित यौन संबंध के बाद गर्भधारण करने में विफलता से परिभाषित होती है। बांझपन लाखों लोगों को प्रभावित करता है – और इसका प्रभाव उनके परिवारों और समुदायों पर पड़ता है।

Infertility :

डॉ.  शर्मा ने बताया कि बांझपन प्राथमिक या माध्यमिक हो सकता है। प्राथमिक बांझपन तब होता है जब किसी व्यक्ति ने कभी गर्भधारण नहीं किया हो, और माध्यमिक बांझपन तब होता है जब कम से कम एक पूर्व गर्भधारण हो चुका हो। प्रजनन संबंधी समस्याएं और बांझपन, वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती गंभीर चिंता है। समय के साथ इसका जोखिम और भी बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में 6 में से एक जोड़ा बांझपन की समस्या से परेशान है, जो कई प्रकार की सामाजिक नकारात्मकता को भी बढ़ाने वाली समस्इसके अलावा, पर्यावरण प्रदूषकों और विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने से युग्मक (अंडे और शुक्राणु) सीधे तौर पर विषाक्त हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी संख्या कम हो जाती है और गुणवत्ता खराब हो जाती हैइसके अलावा, पर्यावरण प्रदूषकों और विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने से युग्मक (अंडे और शुक्राणु) सीधे तौर पर विषाक्त हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी संख्या कम हो जाती है और गुणवत्ता खराब हो जाती हैया हो सकती है। दुनिया की लगभग 17.5% वयस्क आबादी में यह जोखिम देखा जा रहा है, जिसके बारे में सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

पुरुषों या महिलाओं में बांझपन जटिल और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण स्थिति हो सकती है जो व्यक्तियों पर गहरा प्रभाव डालती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह जानना महत्वपूर्ण है कि बांझपन सिर्फ एक चिकित्सीय चिंता नहीं है, बल्कि इसके कारण सामाजिक रूप से भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
समय के साथ फीमेल इनफर्टिलिटी के साथ मेल इनफर्टिलिटी की समस्या बढ़ गई है। इसके पीछे महिलाओं में एग रिजर्व और क्वालिटी कम होना और पुरुषों के स्पर्म काउंट व क्वालिटी में गिरावट मुख्य कारण हैं।

इस गिरावट के पीछे की वजह तनाव, मोटापा, शारीरिक गतिविधि में कमी है, जिसकी वजह से फर्टिलिटी रेशो 1.8 प्रतिशत से घटकर 2019-20 में घटकर 1.4 प्रतिशत रह गया है।पुरुष या महिला प्रजनन प्रणाली में बांझपन कई अलग-अलग कारकों के कारण हो सकता है। हालाँकि, कभी-कभी बांझपन के कारणों की व्याख्या करना संभव नहीं होता है।
पुरुष प्रजनन प्रणाली में, बांझपन आमतौर पर वीर्य के निष्कासन (1), शुक्राणु की अनुपस्थिति या निम्न स्तर, या शुक्राणु के असामान्य आकार (आकृति) और गति (गतिशीलता) में समस्याओं के कारण होता है।महिला प्रजनन प्रणाली में, बांझपन अंडाशय, गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंतःस्रावी तंत्र की कई असामान्यताओं के कारण हो सकता है।

बांझपन का क्या कारण है?
पुरुष या महिला प्रजनन प्रणाली में बांझपन कई अलग-अलग कारकों के कारण हो सकता है। हालाँकि, कभी-कभी बांझपन के कारणों की व्याख्या करना संभव नहीं होता है।

महिला प्रजनन प्रणाली में बांझपन निम्न कारणों से हो सकता है:

1.ट्यूबल विकार जैसे अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूब, जो अनुपचारित यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) या असुरक्षित गर्भपात, प्रसवोत्तर सेप्सिस या पेट/पेल्विक सर्जरी की जटिलताओं के कारण होते हैं;

2.गर्भाशय संबंधी विकार जो प्रकृति में सूजन वाले हो सकते हैं (जैसे कि एंडोमेट्रियोसिस), प्रकृति में जन्मजात (जैसे सेप्टेट गर्भाशय), या प्रकृति में सौम्य (जैसे फाइब्रॉएड);
3.अंडाशय के विकार, जैसे पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम और अन्य कूपिक विकार;

अंतः स्रावी तंत्र के विकार प्रजनन हार्मोन के असंतुलन का कारण बनते हैं। अंतःस्रावी तंत्र में हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्रंथियां शामिल हैं। इस प्रणाली को प्रभावित करने वाले सामान्य विकारों के उदाहरणों में पिट्यूटरी कैंसर और हाइपोपिटिटारिज्म शामिल हैं।इसके अलावा, पर्यावरण प्रदूषकों और विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने से युग्मक (अंडे और शुक्राणु) सीधे तौर पर विषाक्त हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी संख्या कम हो जाती है और गुणवत्ता खराब हो जाती है

बांझपन का इलाज क्या है?
अगर कपल्स जवान हैं और उनके सारे टेस्ट नॉर्मल हैं, तो उन्हें फर्टाइल पीरियड के बारे में जानकारी दी जाती है। इस पीरियड में कंसीव करने की संभावना काफी ज्यादा होती है। अगर उसके बाद भी सफलता नहीं मिलती है तो आईयूआई (इंट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन) की मदद ली जाती है।

यदि महिला पार्टनर की ट्यूब में दिक्कत हैं, पुरुष पार्टनर के सीमन पैरामीटर असामान्य हैं या फिर महिला की उम्र ज्यादा है और बेसिक पैरामीटर नॉर्मल हैं तो आईवीएफ करवाने की सलाह दी जाती है। जब पुरुषों में स्पर्म काउंट, क्वालिटी या मोबिलिटी कम होती है, तो उस कंडीशन में इंट्रा साइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) किया जाता है। ये टेक्निक मेल इनफर्टिलिटी का इलाज करने में मदद करती है। इसमें बाहरी परत हटाकर अंडे को स्पेशलाइज्ड माइक्रोस्कोप में पकड़ते हैं और बेहतर शुक्राणु को पकड़कर एक सुई के द्वारा एग के अंदर छोड़ते हैं।

एग फ्रीजिंग क्या है?
आज के इस दौर में जहां माता पिता बनने के लिए आईवीएफ का चलन जोरों शोरों से चल रहा है तो वहीं दूसरी तरफ एग फ्रिज करवाने का भी चलन तेजी से बढ़ रहा है. कई ऐसे सेलिब्रिटी हैं जिन्होंने अपना एक फ्रिज करवा लिया हैं. दरअसल कई बार फैमिली प्लानिंग के लिए कुछ लोग तैयार नहीं होते हैं या फिर कैरियर को बनाना ज्यादा जरूरी समझते हैं ऐसे में उम्र बढ़ती चली जाती है प्रजनन की क्षमता घटने लगती है. अब ऐसे में करियर बनाने के चक्कर में मां का सपना अधूरा ना रह जाए इसके लिए आधुनिक तकनीक से एग फ्रीजिंग की मदद ली जा रही है, ताकि महिलाएं बड़ी उम्र में भी स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकें , यह एक सिंपल टेक्निक है, जिसे फैमिली प्लानिंग में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें इंजेक्शन लगाकर मल्टीपल फॉलिकल और एग्स का विकास बढ़ाया जाता है। एग्स के तैयार होने पर अल्ट्रासाउंड गाइडेंस में ​उनको बाहर निकाला जाता है। इस दर्दरहित प्रक्रिया में 10-12 दिन लगते हैं। प्रेगनेंसी के लिए तैयार होने पर क्लीनिक जाकर एग्स को फर्टिलाइज करवा सकती हैं। महिलाओं को एग फ्रीजिंग को 35 वर्ष की उम्र से पहले करवाना बेहतर माना जाता है।

डॉ. संगीता शर्मा नोएडा शहर के नामी डॉक्टर या वरिष्ठ सलाहकार डॉ. संगीता शर्मा स्त्री रोग विशेषज्ञ और लेप्रोस्कोपिक सर्जन जो फेलिक्स हॉस्पिटल मे कार्यरात है ने जूनियर रेजीडेंसी लाल बहादुर शास्त्री हॉस्पिटल, मुलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज से की है वा डीएनबी सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल से कि जिसके बाद एम्स में काम किया ,सीनियर रेजिडेंस उन्हें दादा देव हॉस्पिटल से की है |

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