Ghaziabad news : धर्म संस्थापक योगेश्वर कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से सम्पन्न

 Ghaziabad news : धर्म संस्थापक योगेश्वर कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से सम्पन्न
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Ghaziabad news : आर्य समाज राज नगर, सेक्टर-5 में धर्म संस्थापक योगेश्वर कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से सम्पन्न हुआ।इस अवसर पर पुरोहित दुर्गा प्रसाद जी के ब्रह्मत्व में महायज्ञ सम्पन्न हुआ,यज्ञोप्रान्त यज्ञमानों को आशीर्वाद दिया ओर उन्होंने श्रीकृष्ण के जीवन पर प्रकाश डाला।

अम्बाला से पधारी सुप्रसिद्ध भजनोपदेशिका श्रीमती श्वेता आर्या व साथी कलाकारों ने श्रीकृष्ण की महिमा पर भजनोपदेश के द्वारा श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

विशिष्ठ अतिथि के रूप में पधारे पार्षद श्री राजेन्द्र त्यागी ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की सभी को बधाई दी।उन्होंने कहा श्रीकृष्ण का जीवन गुणों से और श्रद्धा से भरपूर है,वे 16 कलां सम्पूर्ण थे, उनके आचरण को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी ऒर कहा कि हम बुद्धि व बल प्राप्त कर अपने राष्ट्र व मनुष्य जाति का कल्याण करें।

मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली से पधारे वैदिक विद्वान प्रो डा धर्मेंद्र शास्त्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि सात स्वरों को साधने वाला संगीतज्ञ बन जाता है।बांसुरी के भी 7 स्वर हैं।वे स्वर हैं महा मानवता,मनुष्यता,निर्लोभिता,शालीनता,विनम्रता,पवित्रता, नी तिमत्ता,सदाचारी उनका व्यक्तित्व और कृतित्व महान है।अतः महाभारत को पढ़ो,हम उनके कुछ गुणों को धारण करें,तभी पर्व मनाना सार्थक है।उन्होंने छोटे छोटे ट्रैक्ट बांटने की प्रेरणा की।

संरक्षक श्रद्धानंद शर्मा ने कहा कि श्री कृष्ण के जन्म के समय भारत खण्ड-खण्ड में विभक्त था।’गृहे गृहे ही राजानं: स्वस्य स्वस्य प्रियं करा:’ अर्थात घर घर राजा हैं और अपने ही हित में लगे हुए हैं।सम्पूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में बाँधने वाला कोई ना था।कंस,जरासन्ध, शिशुपाल,दुर्योधन आदि जैसे दुराचारी व विलासियों का वर्चस्व बढ़ रहा था।राज्य के दैवीय सिद्धान्त से भीष्म जैसे योद्धा तक बंधे हुए थे।ऐसी घोर अन्धकार पूर्ण रात्रि में श्री कृष्ण का जन्म हुआ।अपने अद्भुत चातुर्य एवं कौशल से श्रीकृष्ण ने इन राजाओं का विनाश करवाकर युधिष्ठिर को चक्रवर्ती सम्राट बनवाया।

आर्य समाज के यशस्वी मंत्री व कुशल मंच संचालक चौ.सत्यवीर जी ने कहा कि जिस समय श्रीकृष्ण जन्म हुआ उस समय अधर्म का प्राबल्य था।कृषक को भारी कर चुकाना पड़ता था, ऐसे में आतताई जरासंघ का मारमर्दन किया।वे धर्म पर चलने वाले पांडवों के पक्षधर रहे।

समाज के प्रधान डा वीरेन्द्र नाथ सरदाना ने सभी दूर दूर से पधारे श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

समाज सेवी एवं उद्योगपति ओम प्रकाश आर्य ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आप्त पुरुष, योगीराज,सदाचारी,राष्ट्र भक्त,एक पत्नी व्रतधारी,धर्मधुरन्धर,गो भक्त,मातृपितृ भक्त,वेद मर्मज्ञ, महान् योद्धा,सुदर्शन चक्रधारी श्री कृष्ण महाराज के उपरोक्त गुणों को नई पीढ़ी को बताने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के कोषाध्यक्ष माया प्रकाश त्यागी,श्रीमती आशा चौधरी,वंदना अरोड़ा,शिल्पा गर्ग,सर्वश्री सेवा राम त्यागी, वीके धामा, नरेंद्र पांचाल,प्रवीण आर्य, सुभाष चन्द गुप्ता,शशिबल गुप्ता, ओम प्रकाश शर्मा आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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