Delhi News : क्या महिलाओं को पीरियड्स में एक्सरसाइज करनी चाहिए या नहीं

 Delhi News : क्या महिलाओं को पीरियड्स में एक्सरसाइज करनी चाहिए या नहीं
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Delhi News : पीरियड्स महिलाओं के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं और यह समय महिलाओं के लिए एक कठिन भी होता है। इस दौरान स्वस्थ दिनचर्या और उचित आहार का महत्व बढ़ जाता है। पीरियड्स के दौरान महिलाओं की गलत आदतें अपनाने से उनकी समस्या बढ़ सकती है। आजकल महिलाएं पीरियड्स के दौरान भी अपना फिटनेस रूटीन नहीं छोड़ती हैं।

आशा आयुर्वेदा स्थित डॉ. चंचल शर्मा बताती है कि मासिक धर्म के दौरान शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों के साथ साथ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं। और कई महिलाएं यह सवाल उठाती हैं कि क्या पीरियड्स के दौरान एक्सरसाइज करनी चाहिए या नहीं? तो इसका जवाब न है, क्योंकि इसके पीछे कई कारण मौजूद है जैसे कि:

पीरियड्स के दौरान शारीर में उपलब्ध हार्मोनल परिवर्तन के कारण आपकी ताकत कम हो सकती है और कुछ महिलाएं इस समय में थकान और कमजोरी महसूस कर सकती हैं।
कुछ महिलाएं पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द, उल्टी आना, जी मचलाना और अन्य शारीरिक असुविधाएं महसूस कर सकती हैं।
इस समय व्यायाम करने और बहुत सक्रिय जीवन जीने के लिए अधिक रक्त परिसंचरण और गर्मी उत्पन्न करने की आवश्यकता होती है। पीरियड्स’ के दौरान, पहले ही हमारा बहुत सारा खून बह जाता है, इसलिए स्वाभाविक रूप से हम शारीरिक रूप से कमजोर और मानसिक रूप से कम सक्रिय हो जाते हैं।
एंडोमेट्रियल लाइनिग में बनने वाले अतिरिक्त रक्त से हमारे शरीर के अंदर बहुत अधिक गर्मी पैदा होती है जो मासिक धर्म के दौरान निकलती है, जो शरीर को ठंडा बनाने का काम करती है। अगर ऐसे में एक्सरसाइज करते है तो शरीर तापमान बड़ सकता है, जिससे पीरियड्स के समय परेशानी हो सकती है।
पीरियड्स में एक्सरसाइज करने से अपान वायु (मासिक धर्म के रक्त के नीचे की ओर प्रवाह के लिए जिम्मेदार) ऊपर की ओर बढ़ने लगती है। जो भविष्य में पीरियड क्रैम्प्स, एंडोमेट्रियोसिस, एडेनोमायोसिस का कारण बन सकता है।
एक्सरसाइज करने से तनाव, मानसिक और शारीरिक दोनों, हार्मोनल असंतुलन और पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) जैसे विकारों को जन्म देता है।

इसके अलावा डॉ. चंचल बताती है कि एक पीरियड्स वाली महिला के लिए बताए गए भोजन और गतिविधियों में लगातार शामिल होने से उनके प्रमुख शरीर के प्रकार के आधार पर निम्नलिखित असुविधाएँ होती हैं:
वात प्रकृति के लोगों के लिए पीरियड्स के दर्द से जुड़ा होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अधिक वात के कारण शीतलता (ठंडा) और खरा (खुरदरापन) उत्पन्न होती है, जिससे रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। यह वात के मुक्त प्रवाह को बाधित करता है और इसलिए पीरियड्स के समय दर्द ज्यादा होता है।
पित्त प्रधान के लोगों के लिए, मासिक धर्म चक्र में भारी रक्तस्राव और स्तनों में सूजन शामिल होती है।
कफ प्रधान लोगों के लिए, मासिक धर्म प्रवाह भारी होता है, मासिक धर्म के रक्त में थक्के होते हैं।

आप अगर आपको पीरियड्स के समय असहता महसूस होती है तो व्यायम के रुप में प्राणायाम कर सकते है और अपने खानपान पर ध्यान देने की जरुरत है। पीरियड्स से जुड़ी हर समस्या का इलाज आयुर्वेद पद्धति से संभव है, इसलिए ऐसी किसी भी समस्या में आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लें।

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