Chaitra Navratri : जानें कैसे कैसे रुपों में मनाया जाता है चैत्र नवरात्रि का पर्व 

 Chaitra Navratri : जानें कैसे कैसे रुपों में मनाया जाता है चैत्र नवरात्रि का पर्व 

Chaitra Navratri: Know how the festival of Chaitra Navratri is celebrated in different forms

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Chaitra Navratri : चैत्र माह का आरंभ जैसे ही होता है वैसे ही नवरात्रि के आगमन की सूचना भी मिल जाती है. हिंदू धर्म चैत्र माह का शुक्ल पक्ष नव वर्ष के आने का समय है जिसे हिंदुओं के नए साल के रुप में देखा जाता है. इस दिन को भारत वर्ष में अलग अलग रुपों में मनाया जाता है. यह समय सांकृतिक एकता की बेहतरीन मिसाल का समय भी होता है. अलग – अलग संप्रदायों के लोग इस दिन को अपनी मान्यताओं और विश्वासों के रुप में मनाते हैं जिसमें सभी का एक ही मूल तत्व शामिल होता है और वह है नवीनता एवं जीवन में समृद्धि का स्वागत करना.

Chaitra Navratri :

 

आइये जानते हैं देश भर में इस उत्सव की धूम का रंग 

नवरात्रि से होता है शक्ति का आहवान 
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा का रुप उत्तर भारत में नवरात्रि की धूम के साथ देखा जाता है. घरों में देवी के आगमन का स्वागत होता है. शक्ति स्वरुपा माता की पूजा की जाती है तथा नौ दिनों को नव ग्रहों की शांति स्वरुप भी पूजा जाता है. इस समय पर ये 9 दिन जीवन में बड़े बदलावों का संकेत बनते हैं. इसके साथ ही मौसम के बदलाव के प्रति जीवन को तैयार करने का समय भी होता है.

विक्रम सम्वत्सर का आरंभ 
नवरात्रि के समय को नव वर्ष अनुसार कई तरह के संवत्सर के रुप में देखा जाता है जिसमें विक्रम संवत के आरंभ होने का महत्व रहा है, जिसे हिंदुओं के लिए नए साल की शुरुआत के रुप में जाना जाता है. इस समय के अनुसार ही पंचांगों की गणना के अनुसार देश की कुंडली नए साल की कुंडली का निर्माण होता है और यह स्थिति मेदिनी ज्योतिषी में बेहद उपयोगी मानी गई है इसी के साथ सभी प्रकार के व्रत त्यौहारों का भी पालन आरंभ होने की सूचना दी जाती है.

गुड़ी पड़वा 
गुड़ी पड़वा भी संवत्सर के रुप में स्थान पाता है. इसे  पड़वो भी कहते हैं यह महाराष्ट्रीयन और कोंकणियों द्वारा वर्ष के पहले दिन के रूप में मनाए जाने की परंपरा को दर्शाता है. इस दिन से वर्ष का नया संवत्सर प्रारंभ माना जाता है और साथ ही व्रत एवं पर्वों को इस समय पर आगे के लिए स्थापित किया जाता है.

उगादी या युगादी 
इस दिन को कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में उगादी के रूप में मनाए जाने का विधान रहा है. इस दिन को सांस्कृतिक रुप से प्रेम एवं सौहार्द के रुप में मनाय अजाता है. अपने प्रभुको याद करते हुए जीवन की शुभता एवं प्रसन्नता की कामना की जाती है. दक्षिण भारत में इस दिन की धूम कुछ अलग ही रुप में दिखाई देती है. इस दिन को लोग कई रुपों में मनाते हैं जिसमें दिन का आरंभ अनुष्ठान स्वरुप तेल-स्नान से होता है इसके पश्चात शास्त्रों के अनुरुप कार्यों को किया जाता है.

चंद्रमा और सूर्य की स्थिति पर विचार करते हुए पंचांग का आधार निर्मित होता है. इस वजह से हिंदू नववर्ष को अलग-अलग नामों से अलग-अलग समय में मनाया जाता है. हिंदू नव वर्ष को तमिलनाडु में पुथंडु, असम में बिहू, पंजाब में वैशाखी, उड़ीसा में पाना संक्रांति के नाम से जाना जाता है. वहीं चैत्र माह के समय पर आने वाली स्थिति इस रुप में अलग अलग नामों से देश भर में दिखाई देती है.

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